बेगूसराय। पिछले करीब 35 वर्षाें से पागलों की जिन्दगी जी रहे गणित गुरु वशिष्ठ नारायण सिंह ने अब टोपी उतार दी है। यही नहीं उनको नई दिल्ली के निमहांस के चिकित्सकों द्वारा दी गई पांचों दवाईयां भी एक सप्ताह से बंद है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त नींद है। अब उनके हाथ और जेब में कोई फालतू सामान नहीं रहता है। वे अब अपनी पिछली दुनिया की कुछ कहानियां भी सुनाते हैं और अपने गुरु डा. केली से मिलना चाहते हैं। यह सुधार उनमें आया है माइनिंग इंजीनियर रवि शंकर के रिवर्ट सिग्नलिंग पद्धति द्वारा इलाज से। रवि शंकर ने दुनिया भर के न्यूरोलाजिस्टों से उनमें आ रहे बदलावों को देखने की अपील की है। अब बताते हैं डा. केली के बारे में। यह वो शख्स है जिसने डा. वशिष्ठ की प्रतिभा को पटना विश्वविद्यालय में पहचानी और कैलिफोर्निया पहुंचाये। आरा डीएम जितेन्द्र सिन्हा के आदेश पर शहर के एक गुप्त स्थान पर रखकर पिछले पन्द्रह दिनों से डा. वशिष्ठ का इलाज मेटल-मिनरल व मसाज द्वारा रवि शंकर कर रहे हैं। गणितज्ञ के साथ उनकी 85 वर्षीया वृद्ध मां ल्हासो देवी और छोटे भाई अयोध्या प्रसाद सिंह भी हैं। गणित गुरु में हो रहे सुधारों से ये चकित हैं। उनमें सुधारों की लम्बी फेहरिस्त है। भीषण गर्मी में भी उन्हें पसीना नहीं आता था लेकिन अब बिजली जाते ही परेशान हो पसीना से लतपथ हो जाते हैं। वे हमेशा गणित की छोटी-छोटी अबूझ पहेलियां दीवालों-कापियों व अखबारों पर लिखा करते हैं। इसमें भी बहुत कमी आयी है। देखिए उनमें सुधार के लक्षण, वे दिल्ली में रहने वाले अपने बड़े भतीजे मुकेश से मोबाइल पर बात करते हैं कइसन बाड़ बऊवा, खाना बढि़यां से खईह। इसके बाद और नसीहतें वह देते हैं। हमेशा अवचेतन अवस्था में रहने वाले वशिष्ठ नारायण अब चेतना में लौटने लगे हैं। तभी उन्हें भूख भी लगने लगी है और चेहरे पर चमक भी लौटी है। उनके इलाज का खर्च उठा रहे मानस फाउंडेशन, मुम्बई के नीतीन केनी कहते हैं हमारा प्रयास विश्व के इस अमूल्य रतन को वापस लौटाना है। इस अभियान में पूरी कामयाबी मिलते ही मानस यह सिद्ध करने में सफल होगा कि रिवर्ट सिग्नलिंग एक ऐसा साईस साबित होगा जिससे ब्रेन की बारिकियों को समझने और इसमें उत्पन्न होने वाली विभिन्न तरह की दिमागी बीमारियों का इलाज बहुत आसान हो जाएगा।
1 comments:
बहुत ही खुशी का समाचार बताया आपने। डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह जल्दी स्वस्थ हों ऐसी परमपिता से कामना करते हैं।
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