मठ-मंदिर संवारने को खुला न्यास बोर्ड का खजाना नीरज कुमार, पटना : बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में एक नया इतिहास रचने का प्रयास किया है। अब तक केवल मठ-मंदिरों से शुल्क वसूलने वाला बोर्ड पहली बार मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए राशि देना भी शुरू कर दिया है। पिछले वर्ष तीन मंदिरों के लिए लाखों रुपये की राशि बोर्ड की ओर से जीर्णोद्धार के लिए दी गयी है। साथ ही अब तक जो दबंग लोग मंदिरों की सम्पत्ति को हड़पने को ही अपना धंधा बना लिए थे आजकल उन्हें भी न्यास बोर्ड के दबाव में जमीन खाली करनी पड़ रही है। जिन मंदिरों में अब तक दलितों का प्रवेश वर्जित था उन्हीं मंदिरों में अब उन्हें पुजारी व महंत बनाया जा रहा है। इसे एक मौन सामाजिक क्रान्ति का संकेत माना जा रहा है। हाल के दिनों में बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं, जिससे मठ-मंदिरों के प्रति लोगों में आकर्षण बढ़ा है। इसी का नतीजा है कि हाल के दिनों में दो सौ से ज्यादा मंदिरों का लोगों ने बोर्ड से पंजीकृत कराया है। राज्य के कई मठ-मंदिरों को दबंगों के कब्जे से मुक्त कराकर बोर्ड ने न्यासों के हवाले कर दिया है। अब तक न्यासों के झमेले से दूर रहने वाले गणमान्य लोगों ने भी न्यास बोर्ड के प्रशासक किशोर कुणाल की पहल पर मंदिरों को संवारने के लिए आगे आयें हैं। उत्तरी बिहार के प्रसिद्ध श्यामा मंदिर को अधिग्रहण में लेने के लिए न्यास बोर्ड को दरभंगा के महारानी से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी लेकिन अन्तत: बोर्ड को सफलता मिली और पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एस.एन.झा की अध्यक्षता में न्यास बना दिया गया। वहीं सोनपुर मंदिर से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रामसुन्दर दास एवं पटना उच्च न्यायालय से अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति राजेन्द्र प्रसाद को जोड़ा गया है। इसी दौरान राजधानी के बेली रोड स्थित राजवंशीनगर महावीर मंदिर एवं शेखपुरा शिव मंदिर को भी सार्वजनिक घोषित किया गया। न्यास बोर्ड ने पालीगंज स्थित राम-जानकी मंदिर एवं बिहटा के शिव मंदिर सहित राज्य के छह मंदिरों में दलितों संतों को पुजारी नियुक्त कर सामाजिक क्रान्ति का सूत्रपात किया है। मंदिरों को दबंगों से मुक्त कराकर समाज से जोड़ने के लिए बोर्ड की ओर से संगत-पंगत योजना शुरू की गयी है। इस योजना के तहत मंदिर में प्रत्येक सप्ताह संगत का आयोजन करना है, जिसमें हर जाति व समुदाय के लोग भाग लेंगे। वहीं वर्ष में एक बार आयोजित होने वाले पंगत में सामूहिक भोज की व्यवस्था की गयी है। बोर्ड ने मंदिरों की आय से लोगों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बेगूसराय के सूजा मठ के अन्तर्गत मेडिकल कालेज खोलने का निर्णय लिया गया है। सोनपुर, मुजफ्फरपुर एवं बोध गया के प्राचीन मंदिरों से लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। बोर्ड ने राज्य में वृद्धाश्रम स्थापित करने के दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
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Tuesday, January 20, 2009
खुला न्यास बोर्ड का खजाना
Posted by Ranjan at 12:38 PM
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