Source :Danik Jagran , Patna Edition

( With her Family )
भुवनेश्वर वात्स्यायन, पटना : फ्राम डुमरा टू नाटिंघमशायर और फिर इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ से आफिसर आफ द आर्डर आफ द ब्रिटिश एंपायर यानी ओबीई। ओबीई इंग्लैंड में सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। इंग्लैंड का यह सबसे बड़ा सम्मान सीतामढ़ी स्थित डुमरा की रहने वाली बिहार की बेटी आशा खेमका के नाम से जुड़ गया है। पूरी तस्वीर का क्लाइमेक्स कुछ यूं है कि एक ओर जहां बिहार में बेटियों की शिक्षा के पिछड़ेपन की चर्चा अक्सर होती रहती है, वहीं बिहार की आशा खेमका को इंग्लैंड में शिक्षा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान के लिए 2009 के आनर लिस्ट में शामिल किया गया है। महारानी एलिजाबेथ के हाथों उन्हें आर्डर आफ द ब्रिटिश एंपायर मिलेगा। आशा खेमका इंग्लैंड की वह पहली एशियाई महिला बन गयीं हैं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पटना में रह रहे उनके परिवार के लोग भी उस समारोह में जाएंगे। सीतामढ़ी के डुमरा स्थित कमला गर्ल्स हाई स्कूल से मैट्रिक पास करने वाली आशा मशहूर न्यायवेत्ता जस्टिस नंदलाल उटवालिया की पोती हैं। 16 साल की उम्र में उनकी शादी मोतिहारी के खेमका परिवार में हुई। तब उनके पति शंकर खेमका की उम्र 19 वर्ष थी और वह मेडिकल के छात्र थे। आशा खेमका के देवर डा. पी.एल. खेमका पटना के जाने-माने चिकित्सक हैं। डा. खेमका बताते हैं- 1978 में उनके भाई डा. शंकर खेमका अपने पूरे परिवार के साथ इंग्लैंड चले गए। डा. शंकर खेमका इंग्लैंड के स्टैफोर्डशायर स्थित क्वींस हास्पिटल में सीनियर कंसलटेंट आर्थोपेडिक सर्जन हैं। आरंभ से ही आशा खेमका को पढ़ाने का शौक था। इंग्लैंड में रहकर वह अपनी पढ़ाई करती रहीं। लगभग बीस वर्षो तक उन्होंनेइंग्लैंड में हाउसवाइफ के रूप में अपने को सीमित रखा और फिर एक कालेज में पार्ट टाइम लेक्चरर हो गयीं। इतने से ही संतोष नहीं था उन्हें, सो लगातार आगे बढ़तीं रहीं। आज आशा खेमका इंग्लैंड के वेस्ट नाटिंघमशायर कालेज की प्रिंसिपल व चीफ एग्जक्यूटिव हैं। यह कालेज इंग्लैंड के सर्वाधिक बड़े कालेजों में एक है। यहां पच्चीस हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं और 1200 लोग कार्यरत हैं। इस कालेज का बजट 50 मिलियन डालर का है। आशा खेमका की हैसियत वहां कुछ इस तरह से है कि वह एसोसिएशन आफ कालेजेज की राष्ट्रीय बोर्ड की बैठक में बैठतीं हैं। शिक्षण व स्किल विकसित करने वाले सेवाओं से जुड़े संगठन नेशनल इनफारमेशन एंड लर्निग टेक्नोलाजीज एसोसिएशन में शामिल हैं। उनकी उपलब्धियों की सूची में यह भी शामिल है कि मई 2008 में उन्हें इंग्लैंड में एशियन वूमेन आफ द इयर का एवार्ड मिला और फिर 2007 में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इंग्लैंड में उन्हें नेशनल ज्वेल एवार्ड मिला। जुलाई 2008 में इंग्लैंड के सिर्फ पांच कालेजों को स्टैंडर्ड इन एजुकेशन विभाग ने ग्रेड-1 दिया था। उसमें आशा खेमका का कालेज शामिल था। उनकी योजना 100 मिलियन डालर का सुपर कालेज बनाने की है। आशा खेमका के पटना स्थित परिजनों को इस बड़े सम्मान की सूचना खुद उन्होंने ही दी। वह कहती हैं- मैं प्रसन्न हूं इस बड़े सम्मान की सूची में अपना नाम देखकर। मैंने अपना पूरा जीवन शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने में लगाया है। मैं अपने परिवार और विशेष रूप से सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट करती हूं कि उन्होंने मुझे सदैव प्रोत्साहित किया। लगभग 55 वर्ष की आशा खेमका अब इंग्लैंड में रोल माडल बन चुकी हैं। उनके तीनों बच्चे बिहार में पैदा हुए हैं। बड़े पुत्र डा. स्नेह नेत्र चिकित्सक हैं। दूसरे पुत्र शील खेमका उद्योगपति हैं। बेटी शालिनी एक प्रतिष्ठत बैंक की आला अधिकारी हैं।

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