Friday, May 01, 2009

विमान से पहुंची किसान की बारात


साभार : दैनिक जागरण , पटना


बाढ़ के ग्वाशा शेखपुरा निवासी विजय कुमार व गया के उमाशंकर प्रसाद के बीच दोस्ती रिश्तेदारी में बदली, लेकिन एक अनोखे अंदाज में। 15 साल पहले विजय ने अपने दोस्त से कहा था, तुम्हारी बेटी ही हमारे घर की बहू बनेगी। बुधवार की रात ऐसा ही हुआ। आज वे रिश्तेदार बन गए। पेशे से किसान विजय अब पटना के मछुआ टोली में रहते हैं और उमाशंकर प्रसाद रांची में। विजय की तमन्ना थी कि उनके बेटे की बारात हवाई मार्ग से रांची पहुंचे, ऐसा ही हुआ। विमान से उनके साथ 90 बाराती बुधवार को रांची पहुंचे। यह शादी दहेज मुक्त रही। बाराती में अधिकतर किसान और सभी पारंपरिक वेशभूषा कुर्ता, धोती और टोपी में सुसज्जित। जब बाराती पोर्टिको में आई तो लड़की पक्ष ने फूलमाला पहनाकर गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। यही नहीं, वहां सभी बारातियों की वीडियोग्राफी भी कराई गई। दूल्हा विनय कुमार उर्फ चंदन और उसके पिता विजय कुमार को सबसे बड़ी माला पहनाई गई। उनलोगों के आने से एयरपोर्ट का नजारा ही बदल गया। वहां उपस्थित सभी लोग एकबारगी उन्हीं की ओर देखने लगे। साथ ही यह जानने का प्रयास करने लगे कि आखिर ये कौन लोग हैं। विजय की एक बेटी भी है, जिनकी शादी पिछले ही महीने जमशेदपुर में हुई है। बकौल विजय, लड़की प्रियदर्शनी के पिता उमाशंकर प्रसाद (दवा व्यवसायी) से उनका पुराना नाता है। उन्होंने दोस्ती तो निभाई ही, दहेज में कुछ नहीं लिया। बदले में बहू पक्ष ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। गाना, बजाना से लेकर, एक से बढ़कर एक व्यंजन। बारातियों ने जमकर शादी का लुत्फ उठाया।

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