Monday, August 03, 2009

हाथ में झोला और ट्रेन से जय श्रीकृष्ण कहते निकले डीजीपी

साभार : दैनिक जागरण , पटना
रविवार को छुंट्टी के दिन अपने अलग ही मिजाज वाले नये डीजीपी आनंद शंकर ने हाथ में लिया एक झोला और निकल पड़े जय श्रीकृष्ण कहते। यूं दरभंगा जिले के बिरौल में राधा-माधव से उनका स्नेह किसी से छिपा नहीं है और गाहे-बगाहे वे दर्शन के लिए पहले भी निकलते भी रहे हैं, पर रविवार की सुबह कई मायने में अनोखी थी। बोले-डीजीपी भी तो राधा-माधव ने ही बनाया सो बगैर दर्शन के कहां चैन।
हाजीपुर स्टेशन सुबह आठ बजे पहुंच गए डीजीपी साहब। तय था संपर्क क्रांति से दरभंगा जाएंगे और फिर वहां से बिरौल के लिए निकलेंगे। हाकिम स्टेशन पर हों और पुलिस वाले थाने में यह भला कैसे संभव था। वैशाली के पुलिस अफसरों का जत्था उनसे मिलने प्लेटफार्म पहुंच गया। सैल्यूट और आशीष के बीच अपना झोला हाथ में लिए रहे आनंद शंकर। किसी के हाथ में नहीं दिया। हां पास खड़े एक पुलिस अफसर को अपनी जेब से पैसा निकालकर कहा- एक जनरल टिकट ले लीजिए श्रीमान। यह सुनकर श्रीमान को तो काठ मार गया। ज्यादा दिमाग न लगाते हुए तुरंत टिकट लाकर डीजीपी को दे दिया। अब मालूम हुआ ट्रेन आने में पंद्रह से बीस मिनट की देरी है। साहब चले गए प्लेटफार्म नंबर एक पर वेटिंग हाल में। वहीं पुलिस अफसरों को प्रवचन दिया-लोगों का विश्वास जीतिये। ट्रेन आ गयी तो बगैर किसी विशेष सुरक्षा और तामझाम के सवार हो गए जनरल डिब्बे में।
उनके इस तरह यात्रा पर निकलने की खबर हवा में फैली और मुजफ्फरपुर के रेल एसपी को सूचना मिली तो वह मुजफ्फरपुर स्टेशन पर आ गए। ट्रेन जैसे ही आयी तो पहुंच गए डीजीपी के पास और कहा-सर प्लीज, एसी में न सही, कम से कम स्लीपर में तो चल चलिए..मनुहार के बाद किसी तरह उन्हें स्लीपर में ले जाया गया।
दरभंगा में लोगों को पहले से पता था डीजीपी आनंद शंकर आने वाले हैं और वहां से वे बिरौल जाएंगे। ट्रेन से उतरने के बाद वे कुछ देर को सर्किट हाउस चले गए। वहां से जिप्सी से बिरौल दरोखर धाम पहुंचे। राधा-माधव निभित कुंज मंदिर में वह अक्सर पूजा अर्चना के लिए आते रहते हैं। यहां एक रिटायर कार्यपालक अभियंता ने अपना आश्रम बना रखा है। राधाकृष्ण से विशेष प्रेम है उनका। यहीं श्री शंकर आते-रहते हैं। अभियंता की चर्चा पूरे इलाके में हैं। पूजा अर्चना के बाद डीजीपी सवारी गाड़ी से समस्तीपुर के लिए निकल गए।
सवारी गाड़ी में एक मुसाफिर के अंदाज में घूमने की बात जब आनंद शंकर से पूछी गयी तो उन्होंने कहा कि उनका मकसद यह भी था कि खुद देखें कि ट्रेन में कैसे की जाती है वसूली। पुलिस की इस आदत को सुधारना जरूरी है। जीआरपी पर फोकस करना है। मोटरी-पोटली वाले से ट्रेन में वसूली बंद होनी चाहिए।

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